Friday, March 2, 2012

Mystic River

the more i see
the less i believe,
the more i stand
the more it scares

who knows
how many more secrets,
this mystic river of life
has stored for me!

Thursday, April 21, 2011

Sometimes, You And Me



















Sometimes I don't want to see,
I just want to feel you,
Your presence, your essence
Your love, your touch.

Sometimes I don't want to speak,
I just want to listen to you,
And if your lips are not tired
I can do it forever.

And Sometimes I will be weak,
Then I just want you to hold me,
I want you beside me
I want you with me, within me.

And Sometimes I just need to go,
Then I want you to learn,
To live without me
because I won't be here, forever.

To me, You are
Sometimes my happiness,
Sometimes my love

To you, I am
Sometimes your praise,
Sometimes your trust

And That's Me and You
Sometimes.

Jaane Kyu

जाने  किसकी  तलाश  में  हो,
उस  खोये - खोये  चाँद  की  फ़िराक  में  हो ?
उसकी  रौशनी  में  अब  रौशन  होगा  कोई  और  जहां,
क्यूँ  तुम  खुद से  इतने  नाराज़  से  हो ?

Sunday, October 24, 2010

An Angel

You walk to me, looking
I was all alone,
you talk to me, feeling
I could talk no more,

You dont know who i am
and i dont know you
but u speak your mind
Your lips never stop.

The sunset, the stars,
the sunrise and the sun
you talk of everything,
and anything that is fun

you made me smile,
and you did too
I had no idea
where we were up to.

So I open up, am talking
and you get answers
I will tell you what i'm thinking
Dont want you to guess anymore

You are not an illusion
You are for real
like a breeze, like a drizzle,
the star, a delusion angel

Nothing could be more idyllic
Nothing more serene
Nothing more complete
oh baby!
Sei molto speciale per me ! (Italian)

And here its me,
Walking with u, thinking
I dont want to be alone,
Talking to u, believing
I need you more, and more.


Saturday, September 25, 2010

Yeh Mera Mann

ना  जाने  क्या  सोचता  है ,
और  ना  जाने  क्यूँ  सोचता  है ,

कहता  है
रास्ते  तो  तू  ढूंढ  ही  लेगा ,
मैंने  कहा
अब  तो  मंजिल  क्या  है ,
यह  भी  नहीं  मालूम .
रास्ते  कहाँ  से  लाऊं ?

फिर  कहता  है
तोड़  दो  उन्  दीवारों  को
आजादी  तो  बस  तुम्हारी  ही  है .
तो  मैंने  पूछा ,
जो  दीवारें  तुमने  बना  रखी  हैं
उनका  क्या  करूँ  ?

ना  जाने  यह  क्या  चाहता  है
और  ना  जाने  क्यूँ  चाहता  है ,

देखता  है  खुशियों  को
पर  खुद  खुश  नहीं  रहता ,
चाहता  है  आसमान  को छूना
लेकिन  ऊँचाइयों  से  डरता  है ,

डूबा  रहता  है  ख्यालों  में
किन्तु  जीना  चाहता  है  यथार्थ  में ,

और  यूँ  तो  यह  मेरा  ही  है
पर  मेरी  सुनता  कब  है  ?

यह  मेरा  मन
ना  जाने  क्या - क्या  सोचता  है .


Main Chahta Hoon

उन्  तितलियों  की भांति ,
कभी  पत्तों  की सीढियां ,
तो  कभी  फूलों  पर
उछलना  मचलना
मैं  चाहता  हूँ .

वो  तारों  की  बातें
वो  गुड़ियों  का  खेल
और  उस  पतंग  के  साथ ,
आसमान  को  छूने  की  तमन्ना
अपने  बचपन  को  फिर  जीना 
मैं  चाहता  हूँ.

उस  पहाड़  के  ऊपर
हाँ  उस  सबसे  ऊँची  चोटी  पर
अपनी  बाहें  फैलाये
कुछ  जोर - जोर  से  चिल्लाना 
मैं  चाहता  हूँ.

तुम्हारा  विश्वास 
जो  तुम्हें  मुझमें  है  माँ ,
आशाएं  करती  हो  जो  मुझसे ,
उन्  विश्वासों  की  कल्पनाओं
को  हकीकत  में  उतरना
मैं  चाहता  हूँ .

जो  हैं  हमसे  कुछ  अलग
थोड़े  लाचार ,
थोड़े  से  ना - खुशकिस्मत
पर  ख्वाबों  से  लबालब
उनके  सपनो  को  पूरा  कर  जाना
मैं  चाहता  हूँ .

थाम  हाथ  लहरें  कहा  ले  चलेंगी
खड़ा  किनारे  सोच  रहा  हूँ
डरता  हूँ ,
पर  कूदने  की  जिद्द  भी  है .
उस  गहराई  में  समा  कर ,
एक  दिन  मोतियाँ  चुरा  लाना
मैं  चाहता  हूँ .




Friday, September 24, 2010

The First Poem

सोचकर  निकले  थे,
दुनिया  बदल  देंगें.
लहरें  आएँगी  तो  क्या,
हम  समंदर  में  नहाना  छोड़  देंगें.

लेकिन
यह  दुनिया , आज  भी  वही  है .
बदल  दिया  है  उसने ,  मुझे

वो  थी  एक  मुस्कान ,
पर  अब  याद  नहीं .
अब  तो  एक  से  लगते  हैं
सभी  चेहरे ,
मिटटी  के  पुतले  से .

पर  धीरे - धीरे ,
जैसे  - तैसे
सीख  लिया  है  मैंने  भी .
वो  नकली  चेहरे
वोह  चौड़ी - सी  मुस्कान

और  फिर
तुमने  भी  तो  साथ  छोड़ा  ना ,
तुम  अगर  गए  न  होते
तो  शायद ,
हम  बदले न  होते .

हाँ  इतना  जरूर  मालूम  है
निकला  तो  मैं  ही  था ,
मगर  इस  बात  से  अनजान
कि  जिसे  मैं  बदलने  चला  था ,
वो  तो  वहीँ ,
पीछे छुट  रहा  था .